कांटे भी चूमते है पाँव को ....
कही तुम राहों में पलके बिछाये तो बैठी नहीं .....
हवाओं में न जाने आज कुछ नमी है ..
कही तुम नैनों में सावन बिछाये तो नहीं बैठी ....
तारें भी देख रहे बाट जोहते ....
कहीं तुम रस्ते पे दीपक जला तो नहीं बैठी .....
पंछी भी गुनगुना रहे है ..
कही तुम उन्हें गाना सिखा तो नहीं रही ......
नदिया का शोर बढ़ता जा रहा ..
कही तुम अपनी सोख अदाएं उन्हें दिखा तो नहीं रही .....
हर फ़ूल हर पता मुस्कुरा रहा ....
कहीं तुम उन्हें हसना सिखा तो नहीं रही .....
काटें भी चूम रहे पैरों को मेरे ...
कही तुम राहों में पलके बिछा तो नहीं रही.......
Thursday, October 29, 2009
kahin tum mujhe bhula to nahi rahi....
Posted by Unknown at 11:41:00 AM
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