तुम्हे जितना भुलाते, तुम उतनी याद आती रही ,
आखें रुकरुक कर गंगा बहाती रही !
रोते-रोते तेरा मुस्कुराना याद आ गया ,
अपनी टिफिन से मुझे खिलाना याद आ गया !
दिल रोता रहा ,
अश्रु बहते रहे ,
तेरा शरमाना याद आ गया ,
पलके झुका कर ओंठ दबाना याद आ गया !
साँझ की दाल में सुगबुगाती हवा ,
जैसे अभी तुमने नाजुक हाथों से मुझे छुआ ,
घूम के देखा , कोई नहीं ,
मेरी परछाई मुझे बस चिढाती रही !.................
तुम क्यों ???
आखिर क्यों???
मुझे इतनी याद आने लगी .......
जागते सोते हर घडी हर लम्हा ...
मुझको तडपती रही ...................
मुझको रुलाती रही .................
रोते-रोते तेरा मुस्कुराना याद आ गया ,
अपनी टिफिन से मुझे खिलाना याद आ गया !
दिल रोता रहा ,
अश्रु बहते रहे ,
तेरा शरमाना याद आ गया ,
पलके झुका कर ओंठ दबाना याद आ गया !
साँझ की दाल में सुगबुगाती हवा ,
जैसे अभी तुमने नाजुक हाथों से मुझे छुआ ,
घूम के देखा , कोई नहीं ,
मेरी परछाई मुझे बस चिढाती रही !.................
तुम क्यों ???
आखिर क्यों???
मुझे इतनी याद आने लगी .......
जागते सोते हर घडी हर लम्हा ...
मुझको तडपती रही ...................
मुझको रुलाती रही .................
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