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Thursday, October 29, 2009

वेवफाई.........


तेरी बेबफाई पे  तुझे फक्र है तो मैं क्या कहूँ ?
खुदा भी झुक जाए शर्म से मैं जिक्र क्या करूँ ?

वह न मिली तो क्या ,उसकी जुदाई तो मिली ,
प्यार में कुछ न मिला तो क्या बेब्फाई तो मिली !

सारे रिश्ते -नातें तोड़ , दूर वह ऐसे हो गयी ,
जैसे प्यार कुछ न हुआ , एक खेल हो गयी !

जिंदगी गमो के दौर में कैद हो कर रह गयी ,
वेवफाई की दुनिया में वफ़ा दम तोड़ कर रह गयी  !

ऐसा घाव दिया जालिम ने
की जख्मे जिगर भरता ही नहीं
गर  मालूम होता पहले - पहल
तो मुहब्बत करता ही नहीं......... 

1 comments:

Unknown said...

dedicated to someone..........
whom i loved more than my life.......
some day u will realize my true love.....
bt then i'll be far enough from u...........

ab kya kahun ..kabhi to vo mere ye do sabd padhegi....bas
isi ummid me jinda hun .....

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