ये झुकी पलके , तन्हाई का आलम ,
मैं बहुत रोई , तुम कहाँ थे बालम !
ये काली-काली रात , बेबसी का आलम ,
मैं बैठी अनछुई सी ,पास आजाओ बालम !
ये ठंडी-ठंडी रात ,बरसात का मौसम ,
अंखियों में नींद भरी सी , जाना न मुझे छोड़ बालम !
बेले की कलियाँ खिल जाने दो ,
मुझे इन फूलों से झगड़ जाने दो ,
कितने प्रश्नो को हल जाने दो ,
मुझे मत रोको बस , हस जाने दो !
बदली से चंदा को ऊपर आ जाने दो ,
घर के आगन में रौशनी आ जाने दो ,
ये कमरे का दरवाजा बंद कर लेने दो ,
घर के दीपक को जरा सो लेने दो !
ये सेज फूलो से सजा लेने दो ,
मुझको आँचल में खुशबुओं को भर लेने दो ,
आज मिटने दो हर अँधेरा दिल की गलिये से,
उनमे प्यार की ज्योति जल जाने दो !
ये अँधेरी काली रात ,तन्हाई का आलम ,
तुझे जी भर के देख लेने दो साजन !
ये गोरी बाहें , मेहंदी रचे हाथ ,
इन बाहों में तुझे भर लेने दो बालम !