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Thursday, October 29, 2009

चाहत तेरी ........

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जब से तुमको पाया है
एक सकूं सा महसूस होता है ,
बेगानों की इस भीड़ में  अब
कोई अपना सा महसूस होता है ;
थामे रहो हाथ को तुम यू हीं
सब कुछ सपना सा महसूस होता है ,
कई मुस्किले है राहों में
पर सफ़र सुहाना लगता है ,
पर मंजिल अपना सा महसूस होता है .................
 बस तुम सिर्फ तुम ............... 

क्यों ??? आखिर क्यों???

12.jpg
तुम्हे जितना भुलाते, तुम उतनी याद आती रही ,
आखें रुकरुक कर गंगा बहाती  रही !

रोते-रोते तेरा मुस्कुराना याद आ गया ,
अपनी टिफिन से मुझे खिलाना याद आ गया !

दिल रोता रहा ,
अश्रु बहते रहे ,
तेरा शरमाना याद आ गया ,
पलके झुका कर ओंठ दबाना याद आ गया !

साँझ की दाल में सुगबुगाती हवा ,
 जैसे अभी तुमने नाजुक हाथों से मुझे छुआ ,
घूम के देखा , कोई नहीं ,
मेरी परछाई मुझे बस चिढाती रही !.................

तुम क्यों ???
आखिर क्यों???
मुझे इतनी याद आने लगी .......
जागते सोते  हर घडी हर लम्हा ...
मुझको तडपती रही ...................
मुझको रुलाती रही .................

kahin tum mujhe bhula to nahi rahi....

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कांटे  भी चूमते है पाँव को ....
कही तुम राहों में पलके बिछाये तो बैठी  नहीं .....

हवाओं में न जाने आज कुछ नमी है ..
कही तुम नैनों में सावन बिछाये तो नहीं बैठी ....

तारें भी देख रहे बाट जोहते ....
कहीं तुम रस्ते पे दीपक जला तो नहीं बैठी .....

पंछी भी गुनगुना रहे है ..
कही तुम  उन्हें  गाना सिखा तो नहीं रही ......

नदिया का शोर बढ़ता जा रहा ..
कही तुम अपनी सोख  अदाएं  उन्हें दिखा तो नहीं रही .....

हर फ़ूल हर पता मुस्कुरा रहा ....
कहीं तुम उन्हें हसना सिखा तो नहीं रही .....

काटें भी चूम रहे पैरों को मेरे ...
कही तुम राहों में पलके बिछा तो नहीं रही.......

apni baahon me mujhe bhar lene do baalam......


ये झुकी पलके , तन्हाई का आलम ,
मैं बहुत रोई , तुम कहाँ थे बालम !


 ये काली-काली रात , बेबसी का आलम ,
मैं बैठी अनछुई सी ,पास आजाओ बालम !

ये ठंडी-ठंडी रात ,बरसात का मौसम ,
अंखियों में नींद भरी सी , जाना न मुझे छोड़ बालम !

बेले की कलियाँ खिल जाने दो ,
मुझे इन फूलों से झगड़ जाने दो ,
कितने प्रश्नो को हल जाने दो ,
मुझे मत रोको बस , हस जाने दो !

बदली से चंदा को ऊपर आ जाने दो ,
घर के आगन में रौशनी आ जाने दो ,
ये कमरे का दरवाजा बंद कर लेने दो ,
घर के दीपक को जरा सो लेने दो !
13.jpg

ये सेज फूलो से सजा लेने दो ,
मुझको आँचल में खुशबुओं को भर लेने दो ,
आज मिटने दो हर अँधेरा दिल की गलिये से,
उनमे प्यार की ज्योति जल जाने दो !

ये अँधेरी काली रात ,तन्हाई का आलम ,
 तुझे जी भर के देख लेने दो साजन !
ये गोरी बाहें , मेहंदी रचे हाथ ,
इन बाहों में तुझे भर लेने दो बालम ! 

वेवफाई.........


तेरी बेबफाई पे  तुझे फक्र है तो मैं क्या कहूँ ?
खुदा भी झुक जाए शर्म से मैं जिक्र क्या करूँ ?

वह न मिली तो क्या ,उसकी जुदाई तो मिली ,
प्यार में कुछ न मिला तो क्या बेब्फाई तो मिली !

सारे रिश्ते -नातें तोड़ , दूर वह ऐसे हो गयी ,
जैसे प्यार कुछ न हुआ , एक खेल हो गयी !

जिंदगी गमो के दौर में कैद हो कर रह गयी ,
वेवफाई की दुनिया में वफ़ा दम तोड़ कर रह गयी  !

ऐसा घाव दिया जालिम ने
की जख्मे जिगर भरता ही नहीं
गर  मालूम होता पहले - पहल
तो मुहब्बत करता ही नहीं......... 

EK VAADA JINDAGI SE...


लम्हा -लम्हा खुद में सुलगते रहेंगे ,
दर्द  भी उठे , दिल में दबाते रहेंगे ,
तुम गैर की जिन्दगी  हो फिर भी ,
तुम्हारे लिए मरते थे , मरते रहेंगे ;
                                            सीने के सपने मिटाए रहेंगे ,  
                                             आंसू भी छलके तो पीते रहेंगे ,
                                             मुहब्बत से वाकिफ नहीं हैं फिर भी ,
                                              तुम्हारे लिए जीते थे , जीते रहेंगे !

बस एक गुजारिश है तुमसे ,
कब्र पे मेरी आ जाना ,
एक  लाल गुलाब  चढा जाना ,
दो बूंद आंसू के गिरा जाना ,
बस एक बार ही सही ,
दिल से  मुझे याद कर लेना ,
फिर चाहे  पागल , आशिक जो भी कहना !

                                                       उसी कब्र में हम सोते है ,सोते रहेंगे ,
                                                        इस दुनिया में मिल न सके ,
                                                       उस दुनिया तक तेरा इन्तजार करेंगे ,
                                                       तुम्हारे लिए पल-पल तड़पते हैं ,तड़पते रहेंगे ,
                                                        तुम्हारे बिना तिल -तिल मरते हैं , मरते रहेंगे ......

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